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DAINIKMAIL FOLLOW UP कहाँ गए रत्न अस्पताल में भ्रूण जांच के लिए दिए गए 25 हजार! तो क्या मुफ्त में गर्भ जांच कर रहा था रत्न अस्पताल, रतन अस्पताल रेड के अनसुलझे सवाल

जालंधर  के रत्न अस्पताल में रेड हुई हंगामा भी हुआ और केस दर्ज भी हो गया मगर इस केस में सेहत विभाग और पुलिस  दोनो पर सवाल उठे है। सेहत विभाग की टीम रेड करने गयी तो पुलिस को भनक तक नही लगने दी मगर जब कंट्रोल रूम पर कॉल आयी कि रतन अस्पताल में डॉक्टर से मारपीट हुई है तो पुलिस मौके पर पहुंची और रेड करने वाले डिटेक्टिव एजेंसी को हिरासत में लिया गया। मौके पर रेड करने वाले एसीपी की माने तो मीडिया के सामने ही टीम से अथॉरिटी मांगी गई थी मगर न ऑथॉरिटी दिखाई न आई कार्ड इस लिए कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए उन्हें थाने ले जाया गया। इस मामले में वर्तमान एसीपी चैत्रा की माने तो पुलिस को सेहत विभाग की तरफ से रेड की कोई सूचना नही दी गयी थी इसलिए पुलिस पर सवाल उठाना गलत है क्योंकि पुलिस मौके पर कंट्रोल रूम की कॉल के कारण गयी थी। 

 

लापरवाही किसकी कौन जिम्मेवार!

इस पूरे मामले में लापरवाही किसकी है पुलिस या सेहत विभाग की। सवाल यह उठता है कि यदि सेहत विभाग ने रेड की तो मौके पर पुलिस क्यो नही बुलाई गई। यही नही मौके पर रंगे हाथ गिरफ्तारी क्यो नही की गई।

तो क्या मुफ्त में भ्रूण जांच कर रहा था रतन अस्पताल।

भ्रूण जांच के मामले में डॉक्टर बलराज गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने 25 हजार लेकर भ्रूण जांच की। मगर यह 25 हजार कहा है। नियम है कि ऐसे नोट के नंबर नॉट कर मौके से पैसे देने के बाद नम्बर नित कर बरामद किए जाते है मगर इस केस में यदि डॉक्टर बलराज गुप्ता ने पैसे लिए थे तो वो पैसे कहाँ है। ऐसे में यदि नोट बरामद नही होते तो यह साबित नही होता कि पैसे लेकर भ्रूण जांच की गई । मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि सेहत विभाग की टीम की जिम्मेवारी थी कि मौके से पैसे बरामद करवाये जाए मगर ऐसा नही हुआ जिससे पैसो का लेनदेन साबित करना पुलिस के गले की फांस बन सकता है। यदि पैसो का लें देन हुआ तो क्या सेहत विभाग ने ही बिना बरामदगी के केस में को हल्का करने का खेल किया इसका खुलासा तो जांच के बाद ही होगा।

सेहत विभाग के लापरवाही से कमजोर FIR

इस पूरे मामले में फरारी से पहले डॉक्टर बलराज गुप्ता ने पुलिस की हाजरी में अस्पताल में कहा था यदि उन्होंने पैसे लिए है तो उनको पैसे देने या बरामद करने का वीडियो दिखाया जाए। डॉक्टर के इसी कांफिडेंस से पुलिस ने मौके पर टीम को हिरासत में लिया क्योकि वह टीम ऐसा कोई सबूत पेश नही कर सकी।

तो बिना सबूतों के क्यो हुई डॉक्टर गुप्ता पर FIR

अब इस मामले में डॉक्टर बलराज पर बिना सबूतों के केस क्यो दर्ज हुआ इसका सबसे बड़ा एक कारण यह है कि इस एक्ट के मुताबिक यदि कोई वही गर्भवती यह बयान देती है कि उसकी भ्रूण जांच किसी ने की है तो उस पर तुरंत केस दर्ज करने का प्रावधान है और जांच के बाद गिरफ्तारी होगी। शायद इस मामले में यही वजह रही जो डॉक्टर गुप्ता अब तक गिरफ्तार नही हुए।

 

एक महिला पर टिकी जांच की सुई

इस पूरे मामले में नामजद महिला पर जांच की सुई टिकी है क्योंकि जो टीम स्टिंग करने आई थी उसने उक्त महिला से ही संपर्क किया था। हालांकि अस्पताल से उक्त महिला का कोई दस्तावेजी सम्बन्ध नही है क्योकि कही भी अस्पताल के रिकार्ड में उक्त महिला शामिल नही है। 

रतन अस्पताल चाहे तो रखे अपना पक्ष

इस पूरे मामले में रतन अस्पताल का पक्ष सामने नही आया है। यदि अस्पताल प्रबंधन कोई पक्ष रखने चाहता है तो वो दैनिकमेल से संपर्क कर सकता है। उसे भी प्रमुखता से उजागर किया जाएगा। 

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